मंगलवार, 14 जुलाई 2015
Lord Krishna: The Gita (Part-001)-Hindi Poem with English Transl...
Lord Krishna: The Gita (Part-001)-Hindi Poem with English Transl...: The Gita “ पैदल चलती सेना, घुड़सवार थे चहुँ ओर I रथो पे बैठे महायोद्धा, बढ़ते हाथी मचाते शोर II1II भयाक्...
The Gita (Part-001)-Hindi Poem with English Translation
The Gita
“ पैदल चलती सेना,घुड़सवार थे चहुँ ओर Iरथो पे बैठे महायोद्धा,बढ़ते हाथी मचाते शोर II1IIभयाक्रान्त थे लोग सभीबैठा-2 दिल भी था Iकल क्या होंगा ;सोच सभी,
दुःखी्-2 सा मि ल् ता था II2II
द्रश्य विहग़म ? शोर अजीब?
लहू की प्यासी सेना थी I
दो इंच जमीं की खातिर,
आमने सामने सेना थीII3IIविश्वासभरोसा सत्य न्यायदाब पे लगे, सभी सुकर्म Iताज मिलेगा इनको,या विजयी होगे सभी कुकर्म II4IIताल मेल असम्भव है,सत्य झूठ के बीच की खाई Iकटती लाशों को देखा,सदियों से ये चली लड़ाईII5IIआज दौर ये फिर आया,अंहकार भी साथ दिया,Iझूठ ने ठोका दावा अपना ,जड़े सभी की हिला दिया II6IIएक तरफ़ दुर्योधन, दुःशासनसेना उ न की विशाल श्रेष्ठ Iअश्वथामा कर्ण सरीखे,सङ्ग थे पितामह कुल श्रेष्ठ II7IIअप् नौ को देखा खून पिपासु,अर्जुन का मन् वा डोल गया Iनही चाहिए राज सिङ्गाशन ,दिल भी उस् का बोल गया II8IIघबराया, सिर पीटे, रोता हुआ ,अर्जुन हुआ अधीर Iउपाय ना सुझा उस् को कोई,तर्कश मे रख दिये तीर II9IIअप् नौ की लाशो पे राज महल,नही चाहिए, अर्जुन बोला Iडर के मारे कॉंप उठा,दिल बैठा, मन उस् बोला II10IIअर्न्तमन का अर्न्तद्वन्द्ध ,रहा नतीजा सिफर, शून्य Iअपने मुझको जान से प्यारे ,चेतना करती उसको शून्य I11Iमाधव ने अर्जुन को देखा,मुस्काते मुस्काते -सुना सभी Iअर्जुन होगें इस हाल में,देखे माधव नहीं कभी I12Iबार- बार प्रश्नों की बौछार,घबराये अर्जुन करते Iक्यों, क्या, किसको, कैसे ,कहते-2 वे न थकते I13Iमाधव ने दी खुली छूट,जो कहना तुम कहते रहो Iशेष बचे न प्रश्न कोई,मन करता जब तक कहो I14I
अर्जुन भोलाभाला इंशा,
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Braves with swords in hands on elephants,Horses all-round with archers,Charioteers with weapons,Ahead marching were soldiers and sliders I1IFearful and afraid of,Everyone as if dead,What shall come to-morrow ?It made all lost and sad I2IExists as bone of contention,Though civilized we are,People being butchered every day,As if devils they are. I3IFights everywhereAgain this is pride sitting atop,False would move and shake,Ruling from high-top I4IThe unique scene seenBlood thirsty was the army,Moving with dust blowingThe frenzy was the army I5I |
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